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Showing posts from June, 2020

सेना के जवान को शहादत के बाद ही सम्मान क्यों? Respect soldiers all times.

सेना के जवान को शहादत के बाद ही सम्मान क्यों?  Respect soldiers all time. Sena Jawan ko Shahadat ke baad hi Samman kyon? Respect soldiers all time. जब कोई जवान हमारी सरहदों या देश की सुरक्षा करते हुए अपनी जान की आहुति दे देता है तो उसके बाद देश की जनता के दिलों में वो देशभक्ति पैदा हो जाती है कि कुछ पूछिए ही मत। उस समय फेसबुक, वॉट्सएप, इंस्टाग्राम आदि सोशल मीडिया में सिर्फ और सिर्फ सेना के जवानों के बारे में ही लेख और सम्मान देखने को मिलता है। वहां की सरकार और स्थानीय कार्यालय या पुलिस भी बहुत दया भावना दिखाती है। लेकिन उसके कुछ दिनों बाद होता क्या है? सब कुछ सामान्य ,यदि कहीं कोई जवान या उसके परिवार के लोग किसी परेशानी में होते भी है, तो उसकी मदद करने वाले नहीं मिलते। बल्कि फौजी होने के नाते और हेय दृष्टि से ही देखते है। ऐसा क्यों? क्या सेना के जवानों को सम्मान सिर्फ उनके शहादत के बाद ही दिया जाना चाहिए? क्या उनके जीते जी उनको और उनके परिवार को समाज में उचित सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए? आखिर ऐसा क्यों? दोस्तो मै भी एक सेना का अधिकारी हूं।  एक फ़ौजी को समाज म

Happiness vs Success ! क्या खुश रहने के लिए सफलता ज़रुरी है ?

Happiness vs Success !  क्या खुश रहने के लिए सफलता ज़रुरी है? Happiness vs joy, is happiness the key to success, would you rather be happy or successful, happiness comes before success, material success is not equal to happiness, money and successful career can bring real happiness एक इंसान के जीवन के लिए क्या जरूरी है ? खुशी या फिर सफलता ( Happiness vs Success   )! मैंने इस बारे में कई लोगो से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया । इनमें सभी तबके के लोग शामिल है जैसे कि अमीर, गरीब, दुखी, खुश, सफल और असफल, जिनकी बातों और अनुभव से जो जानकारी मैंने प्राप्त की है उसके बारे में आपको अवगत कराने जा रहा हूं। "इंसान सफल तब होता है, जब वह दुनिया को नहीं बल्कि खुद को बदलना शुरू कर देता है।" किसी भी व्यक्ति के जीवन में सफलता और खुशी दोनों का ही बहुत महत्व है। दोनों ( Happiness vs Success   ) का अपने-अपने स्थान पर बहुत महत्व है। परन्तु इस लेख में आपको जो जानकारी मिलने जा रही है वो आपकी आंखे खोल देगी। आपको आश्चर्य कर देगी कि सफलता जरूरी है या जीवन में ख़ुशियाँ या

एक प्रेरणा-सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग ! Motivation-Sabse bada Rog kya kahenge Log.

एक प्रेरणा- सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग !  Motivation- Sabse bada Rog kya kahenge Log. "जीवन में सफल और खुश रहना है तो  एक काम कर लो, लोग क्या सोचेंगे या लोग क्या कहेंगे सोचना छोड़ दो।" लोग क्या कहेंगे ? इसे ही सोचकर हम अपनी इच्छाओं का गला घोंटते आए है। प्रमोशन हुआ पार्टी नहीं दी तो लोग क्या कहेंगे ? शादी में लिफाफे में 100 का नोट मत डालो नहीं तो लोग क्या कहेंगे ? उससे मत मिलो नहीं तो लोग क्या कहेंगे ? उसके साथ मत हंसो नहीं तो लोग क्या कहेंगे ?  ऐसे ही वाक्यों को सुन-सुनकर कान पक गए है । जी हां दोस्तों ये बात आप को मान लेना चाहिए कि अगर आप दूसरों कि बातों को दिल में रखकर चलेंगे कि लोग क्या कहेंगे या लोग क्या सोचेंगे ? तो आप जीवन में खुश रहना  या सफल नहीं हो सकते है । आपको उन्हें ignore करना ही पड़ेगा जो आपके ऊपर टिका-टिप्पणी करते है। "दुनिया में सबसे ज्यादा सपने तोड़े है, इस बात ने की 'लोग क्या कहेंगे?'" हम अक्सर अपने किसी काम को शुरू करने से पहले ही हार मान लेते है, सिर्फ यही सोचकर कि अगला व्यक्ति क्या सोचेगा ? इसके लिए 

निराशा नहीं, आशावादी बनो (Nirasha nahi Ashawadi bano)

निराशा  नहीं , आशावादी बनो  (Nirasha nahi Ashawadi bano) जब हम किसी काम को पूरी मेहनत से करते है, परन्तु किसी कारण से उसका परिणाम जब हमारे अनुकूल नहीं होता, तो हम बिलकुल निराश हो जाते है। हम ये सोचने लगते है की कितनी मेहनत से इस काम को किया था, जिसमे असफल हो गए। जिस कारण से कई लोग तो निराश होकर पूरी जिंदगी अंधेरे में धकेल देते है, जबकि वही दूसरी तरफ जो लोग आशावादी प्रवृत्ति के होते है, असफलता के बाद भी सफलता की आशा के साथ कदम आगे बढ़ाते रहते है,और सफलता हासिल करते है। दोस्तों क्या आपकी निराशा से वो असफल काम सफल हो जायेगा? जी बिलकुल नहीं। जब ऐसा नहीं होगा तो हम इतने निराश क्यों हो जाते है ? क्यों नहीं हम दोबारा अपनी ग़लतियों को सुधार कर एक बार पुनः काम को नए सिरे से शुरू करें और सफल हो जाये।  इसे भी पढ़ें-  आओ एक खुशहाल जिंदगी जिए। Live a happy life in hindi. निराशावादी बनाम आशावादी  नीदरलैंड्स में हुए एक अध्ययन में पाया गया, जो स्थायी रूप से निराशावादी हैं, वह दिल की बीमारियों और अन्य कारणों से अधिक मरते हैं, जबकि आशावादी लोग प्राकृतिक रूप से ही मरते है। ये केवल स्व

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